राष्ट्रपिता को नमन प्रभु नाम का तू प्रतिमूर्ति एकता और भाईचारा का मूर्ति। स्वच्छता को तूने अपनाया, सुन्दर अपना राष्ट्र बनाया। सत्य के पथ पर चलना सिखलाया, अहिंसा अपनाकर जीना…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- Primary Teacher
- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
- विश्व हिंदी दिवस – राम किशोर पाठक
- बाल विवाह: एक अभिशाप – भवानंद सिंह
- मेरी बेटी – सुमन सौरभ
- बाल अभिलाषा – अमितेश कुमार (मलिकौरिया)
- मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नमन मंच – नीतू रानी
- सावित्री बाई फुले – सुमन सौरभ
- कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
- स्वास्थ्य – बैकुंठ बिहारी