विदा होते पल विदा होते पल, हमेशा करता जाता समय का छल! न लौट पाने की आशा और न छू पाने के वे कल!! खट्ठी-मीठी, भूली-बिसरी, यादों के वे सुनहरे…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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