विद्या विद्या अनुपम अद्भुत सम्मान अन्तस जागृत प्रज्ञा अनुतान संकीर्ण तिमिर होता विदीर्ण प्रखर तेजपुंज पाता यशगान । विद्या लौकिक जीवन का आधार संपोषित प्रस्फुटित सद्व्यवहार आध्यात्मिक उन्नयन का नव…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
- तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
- देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
- फाग-राम किशोर पाठक
- फाग क्या होती अम्मा बोल-राम किशोर पाठक
- बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी
- गर्मी आई -नीतू रानी
- सामाजिक न्याय _रामकिशोर पाठक
- पैगाम – राम किशोर पाठक
- भरे हुए भंडार समय पर लूटो-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’