सरस सुपथ जीवन प्रवाह संताप नहीं नैराश्य आर्त नाद पश्चाताप नहीं पथ यह सहज सरलता का सुपथ सुगंधित नैतिकता का संतति को तू गढता चल सरस सुपथ पर बढता चल।…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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