सृजनहार प्रभु हे जग के सृजनहार प्रभु तुम हो पालनहार प्रभु। दुनिया बनाई कितनी सुंदर हरी धरती नीला समंदर नदियाँ, पहाड, चाँद, सितारे उडते रंग बिरंगे पंछी सारे मन को…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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