हम ऐसे क्यूं हैं हर बार मैं यह सोचता हमें सब समझ है आता फिर भूल क्यों हो जाता ये बात समझ न पाता हम ऐसे क्यों हैं हम ऐसे…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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