हम धरती की संतान हैं सृष्टि के कण-कण में देखो, बसते यहाँ भगवान हैं। धरती हमारी माता है, हम इसकी संतान हैं। कितनी प्यारी धरा हमारी, इसका हमें गुमान है।…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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