दंडक छंद6,11,15,10 हे माॅं देवी,कल्याणी पापहरणी,तेरी जय हो महागौरी,कर अघ का धावन। जले दीप,-धर्म द्वार दिन-रात,भजन कीर्तन करे प्रसन्न,स्नेहिल मन ऑंगन। हे दिव्या, श्वेतांबरी माते,चढ़ाऊॅं रौली कुमकुम फल,करुॅं श्लोक पाठन।…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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