अब और क्या बाकी बताना रह गया- गजल २२१२-२२१२-२२१२ अब और क्या बाकी बताना रह गया। इस जिंदगी का गुल[...]
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जमाने में – गजल – राम किशोर पाठकजमाने में – गजल – राम किशोर पाठक
जमाने में – गजल – राम किशोर पाठक कौन है जो कहे जमाने में। मौन सारे लगे बचाने में।। आज[...]
जिए जा रहा हूॅं- गजल राम किशोर पाठकजिए जा रहा हूॅं- गजल राम किशोर पाठक
१२२-१२२-१२२-१२२ उदासी छुपाकर जिए जा रहा हूँ। तभी तो लबों को सिए जा रहा हूँ।। निगाहें जिन्हें ढूँढती है[...]
ग़ज़लग़ज़ल
ग़ज़ल जब हम अपने पर आए वो भी अपने घर आए। उनकी भोली सूरत पर पता नहीं क्यों मर आए।[...]
