गजल – राम किशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

लेख सुनें तैयार

अब और क्या बाकी बताना रह गया- गजल
२२१२-२२१२-२२१२

अब और क्या बाकी बताना रह गया।
इस जिंदगी का गुल खिलाना रह गया।।

हर शख्स होता खास अपने आप में।
पर वक्त का मुझको सिखाना रह गया।।

जो भी मिला है आजतक काफी नहीं।
कुछ और पाने का बहाना रह गया।।

जब अश्क आँखों में भरा उनका मिला।
हूँ सोचता कुछ तो निभाना रह गया।।

सजदा कभी करता रहा जिनके लिए।
है बेबसी क्या पास जाना रह गया।।

धड़कन बनाया था जिसे मैं शौक से।
उसको हृदय में अब बसाना रह गया।।

हूँ फाग का अनुराग दिल में भी लिए।
उनकी निगाहें आजमाना रह गया।।

गुलशन सजाया मैं भला जिसके लिए।
उनके लिए गजरा बनाना रह गया।।

तालीम हासिल हो गई तो है मगर।
हर वक्त यों सिर का झुकाना रह गया।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply