नारी शक्ति है शक्ति की भरमार है नारी शक्ति है शक्ति की भरमार है नारी तो रुपों की खूद अवतार है नारी को जहां समझती है अबला जिसने संभाली सृष्टि…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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