पद्यपंकज Prem,sandeshparak प्रेम बड़ा अनमोल-राम किशोर पाठक 

प्रेम बड़ा अनमोल-राम किशोर पाठक 


Ram Kishore Pathak

लेख सुनें तैयार

महज शब्द मत मानिए, प्रेम बड़ा अनमोल।

तार साँस की जोड़ता, द्वार हृदय का खोल।।

कौन बखाने प्रेम को, जो है चित का भाव।

कब कैसे किससे हुआ, किसको यहाँ लगाव।।

मुमकिन कुछ कहना नहीं, निकल न पाए बोल।

महज शब्द मत मानिए, प्रेम बड़ा अनमोल।।०१।।

साँसों का अहसास यह, हर-पल लगता खास।

जिस पल जाता यह उपज, जगे अजब विश्वास।।

नहीं समझ कोई सका, क्या है इसमें झोल।

महज शब्द मत मानिए, प्रेम बड़ा अनमोल।।०२।।

ईश्वर का प्रतिरूप सा, लगता है यह प्रेम।

सुध-बुध अपनी भूलकर, प्रेमी का ले क्षेम।।

जीवन अनुपम सा लगे, दुनिया समझे लोल।

महज शब्द मत मानिए, प्रेम बड़ा अनमोल।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक 

प्रधान शिक्षक 

सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।

संपर्क – 9835232978

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply