दोहा – राम किशोर पाठक दोहे छाया पति मार्तण्ड का, स्वागत करती भोर। पक्षीगण गायन करें, नृत्य करे वन मोर।। सप्तवर्ण आभा लिए, प्रकट हुए संसार। देख तेज डरकर तिमिर,…
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जीवित्पुत्रिका व्रत
जीवित्पुत्रिका व्रत माता निर्जल व्रत करे, सुखी रहे संतान। महाकाल को पूजती, जो लेते संज्ञान।। एक दिवस उपवास का, कोटि विधि स्वीकार। सुखमय मेरा लाल हो, करती सदा विचार।। भाँति-भाँति…
राष्ट्रीय हिंदी दिवस – दोहे
राष्ट्रीय हिंदी दिवस – दोहे भाषा मधुरिम सरल सी, जन-मानस की चाह। रस अलंकार से युक्त है, रखती शब्द अथाह।।०१।। शब्द समाहित कर रही, हरपल सिंधु समान। स्वाद सभ्यता की…