आज हुआ है तमस घनेरा, दीप जलाइए। फैलाकर उजियारा जग का, मित्र कहाइए।। स्वार्थ भावना को तजने से, खोते कुछ नहीं। करना क्योंकर तेरा मेरा, हिल-मिल जाइए।। दुनिया की दस्तूर…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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