इमान हो उँचा उँचे भवन बना न सको तुम, पर तेरा इमान हो उँचा। ऐसा कोई काम न करना, जिससे तेरा सर हो नीचा। उँचे भवन बना न सको तुम;…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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