ठंड का प्रभाव – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

ठंड का प्रभाव – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ मनहरण घनाक्षरी छंद जाड़े में जो कुहासे से बढ़ जाती ठंड जब, अत्यधिक होती नमी, शीतल पवन में। कभी बढ़ जाती सर्दी, कभी…

निष्पक्ष चुनाव को -जैनेन्द्र प्रसाद

निष्पक्ष चुनाव को मनहरण घनाक्षरी छंद में कुशल हो चाहे मांँझी, चाहे नहीं चले आंँधी, छोटा सा भी एक छेद, डूबा देता नाव को। गोदामों में जमाखोरी, अथवा कालाबाजारी, हमेशा…