दोहा विधान आओं हम सीखा रहे, दोहा लिखना खास। सरल तरीका है यही, करना है अभ्यास।।०१।। जान रहा हूँ मैं यहाँ, ज्ञान हमारा अल्प। फिर भी हूँ बतला रहा, दोहा…
Author: Dr Snehlata Dwivedi
खत -रामकिशोर पाठक
खत – विधाता छंद रखा खत में कभी मैंने, हृदय को खोलकर अपना। लिखा कुछ शब्द जो मैंने, वही तो खास था सपना।। मगर जिसको लिखा मैंने, उसे दे तक…
बिहार दिवस -रामपाल प्रसाद सिंह
बिहार दिवस। हरि गीतिका छंद में। रुकता नहीं बढ़ता सदा रथ,नव नवीन बिहार है। जो पूर्व-उत्तर में अवस्थित,देश का श्रृंगार है।। उत्तर-दिशा में है हिमालय,मध्य गंगा बह रही। मौरंग से…
दोहा रचना कीजिए -रामकिशोर पाठक
दोहा रचना कीजिए – एक प्रयास दोहा रचना जब करें, रखिए इतना ध्यान। मात्रा गिनती स्वर सभी, व्यंजन का न विधान।।०१।। गुरु स्वर की मात्रा सदा, गिनना दो है भार।…
कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक
कैसे आए शांति- सरसी छंद गीत गद्दारों की फौज खड़ी हैं, जो फैलाती भ्रांति। विकट समस्या आज जगत् की, आए कैसे शांति।। सभी जहाँ हैं सीना तानें, बनता खुद सिरमौर।…
बीत गया फागुन माह- रामकिशोर पाठक
चैत्र- राधिका छंद गीत बीत गया फागुन माह, चैत है आया। महुआ का मादक गंध, प्रीत भर लाया।। नूतन आता है वर्ष, लता हर्षाती। शीत उष्ण मिलकर संग, फूर्ति है…
यही है सार जीवन का -एस. के. पूनम
विधा:-विधाता छंद। (यही है सार जीवन का) यहाँ सीखा, रहो मिलकर, न जीओ तुम, निराशा में। पढ़ी सरगम, उमंगों की, न घबराया, हताशा में।। कभी मुड़कर,न देखा प्रिय, जिसे मैं…
आज की नारी -रुचिका
आज की नारी अपने घावों से खुद ही उबरती, संघर्ष की जमीन पर एक नई पटकथा लिखती है वह आज की नारी जो नित नए आयाम को गढ़ती। दोहरी जिम्मेदारी…
दहलीज -रुचिका
दहलीज हर बार वह सोचती की अब नही, मगर कदम उसके ठहर जाते थे घर की दहलीज पर घुटती रहती थी मगर हिम्मत नही जुटा पाती थी की छू ले…
नारी शक्ति – मुन्नी कुमारी
नारी-शक्ति स्व-रचित-कविता नारी की शक्ति अपार, नारी की महिमा अपरम्पार। नारी में गुणों का भंडार, नारी में ममता की बहार। कभी माँ की ममता बहाती, कभी बहन बन प्यार लुटाती।…