जल की बूंदे मचल रही थी जमीं से ही, उठने को ऊपर की ओर राह देख रही थी सूरज का, संग ले जाएगा आसमां की ओर सैर करूँगी आसमान में,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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