खड़ी है तेरे द्वार बहना धागा रक्षा के बांधे तेरे हाथ बहना, राजा भैया तू हर युग में साथ रहना। नित् दिन रहती आश लगाए, सोचती कब शुभ दिन ये…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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