मंजिल दूर नहीं कर्म निरन्तर करता चल व्यर्थ चिंतन छोड़ता चल रणनीतियाँ गढ़ता चल आत्ममंथन करता चल खुद से तुलना करता चल अपने पर विश्वास रख मिल जाएगी ही मंजिल…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- Primary Teacher
- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
- विश्व हिंदी दिवस – राम किशोर पाठक
- बाल विवाह: एक अभिशाप – भवानंद सिंह
- मेरी बेटी – सुमन सौरभ
- बाल अभिलाषा – अमितेश कुमार (मलिकौरिया)
- मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नमन मंच – नीतू रानी
- सावित्री बाई फुले – सुमन सौरभ
- कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
- स्वास्थ्य – बैकुंठ बिहारी