जैसी माँ की बिन्दी, वैसी है हमारी हिन्दी। लालिमा लिए ललाट पे चमके, शब्द-शब्द में सौंधी महके। संस्कारों की प्यारी गाथा, मिट्टी की खुशबू का साथा। कबीर की दोहे वाली,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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