एक अभिशाप – विवेक कुमार बेटी ने पूछा बापू से — “इतनी ब्याह की क्या जल्दी?” थोड़ी तो बढ़ जाने दो, अभी तो मैं नादान हूँ, थोड़ी तो ढल…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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