आया बसंत आया बसंत
आया बसंत आया बसंत
सबके मन को भाया बसंत
दादूर मोर पपीहा बोले
कोयल के मन पीहू बोले
आमों में मंजर लद आये
मंद – मंद भौंरे मुस्काये
बच्चों के मन को भाया बसंत
आया बसंत आया बसंत
सूरज की किरणें जो आयी
सोई नभ में उषा छाई
सर्द-सर्द जो पवने गई
मौसम ने भी ली अंगडाई
ऋतुओं का राजा बसंत
आया बसंत आया बसंत
चारो तरफ हरियाली छाई
पेड़ों में नव शाखा आई
फूलों से लद गई क्यारियाँ
गेहूँ से भर गई बालियां
पतझड़ का हो गया अंत
आया बसंत आया बसंत
खेतों में लहराए सरसों
आज कल में बीते बरसों
हर साल आये जब बसंत
मन में उन्माद भर जाए बसंत
जीवन में रंग भर लाया बसंत
आया बसंत आया बसंत
(प्रधान शिक्षिका)
राजकुमारी
प्राथमिक विद्यालय रैयम (मल्हाटोल)
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Raj kumari
