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नारी का सम्मान, हमें संस्कृति सिखलाती।
जीवन की हर राह, हमें नारी ही दिखलाती।।
देती जब यह जन्म, दुग्ध से पालन करती।
हर-पल भरती नेह, अंक में लालन करती।।
ममता की वह खान, रूप माता की लेकर।
रक्षा करती लाल, प्राण भी अपनी देकर।।
भगिनी का भी रूप, प्यार देती जी भरकर।
चलती पग दो चार, नेह से बाँह पकड़ कर।।
पत्नी का ले रूप, अंग आधी बन जाए।
जीवन भर फिर संग, सहे सुख-दुख मुस्काए।।
मर्यादा के संग, शक्ति है इसने धारी।
जग सूना श्री हीन, जहाँ वंचित हैं नारी।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

