पद्यपंकज padyapankaj उर भरी यही चाह – एस.के.पूनम

उर भरी यही चाह – एस.के.पूनम


S K punam

रात-दिन इंतजार,
कर थकी नहीं आँखें,
खानपान छोड़ कर,माता ताक रहीं राह ।

बीत गए कई साल,
आया नहीं कभी खत,
वत्स-वत्स याद कर,भर रहीं नित्य आह।

उसे पालीं यत्न कर,
आँखों में सपने भर,
लाड़ला सहारा होगा,उर भरी यही चाह।

लेटी मृत्यु शैय्या पर,
दृष्टि नभ तल पर,
आज आया प्रिय पुत्र,आँखें मूंदीं बीते माह।

एस.के.पूनम

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