चैत्र मास आया लेकर नव जीवन का संचार,
संवत्सर नव मंगलमय, भर दे उमंग अपार।
शुक्ल पक्ष की प्रथम रश्मियाँ शुभ संकेत लाए,
वसुंधरा नव रूप सँवारकर हरियाली बरसाए।
कोयल की तान गूँजे आम्र मंजरियों के बीच,
भँवरे गाते नव राग, करतीं कलियाँ परिमल सींच।
सरिता निर्मल कल-कल करतीं जीवन रस लाए,
वातावरण में सौंधी खुशबू मन को खूब लुभाए।
वन उपवन पुलकित होकर नव ऋतु गीत सुनाए,
संध्या और भोर सुगंधित पुष्पों से महकाए।
गोधन गूँजे द्वार-द्वार, कृषक संकल्प उठाए,
हल की रेखाएँ खेतों में सुखदृष्टि दिखाए।
नव ऊर्जा, नव उमंग, हर जीवन में आए,
सपने सच हों, हर मन में शुभ संकल्प जगाए।
राम, कृष्ण, शिव-शक्ति की हो दिव्य आराधना,
संवत्सर का स्वागत करें मंगलमय भावना।
सुरेश कुमार गौरव,
‘प्रधानाध्यापक’
उ. म. वि. रसलपुर, फतुहा, पटना (बिहार)