पद्यपंकज padyapankaj मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’


Devkant Mishar

वृक्ष पुत्र के समान,
रखें सभी नित्य ध्यान,
शुद्ध वायु प्राप्त होती,
बड़े-बड़े काम हैं।

पत्ते हैं गुणकारक,
छाया तो शांतिदायक ,
फूल हैं मनमोहक,
सुखद ललाम हैं।

देवों के होते निवास,
यही तो जीवों की आस,
यही प्राण के आधार,
सच्चे सुखधाम हैं।

आएँ वृक्षों को लगाएँ,
सौम्य शांति सुख पाएँ,
सेवा गुण सुरक्षा से,
जीवन अभिराम हैं।

देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ मध्य विद्यालय धवलपुरा, सुलतानगंज, भागलपुर, बिहार

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