स्वप्निल सा कुछ, टूटता, सँवरता… जिद से, कभी अपने ही मूल्यों से, अतृप्त, बेपरवाह, अकिंचन, अद्भुत… मनोरोग कोई या जिजीविषा[...]
Day: October 5, 2021
सब में प्रभु का रूप समाया-दिलीप कुमार गुप्तसब में प्रभु का रूप समाया-दिलीप कुमार गुप्त
सब में प्रभु का रूप समाया झिलमिल तारों का श्याम व्योम अवनि के वक्ष पर अवतरित हिम ओम अथाह सिंधु[...]
