छंद मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ January 9, 2025 Dev Kant MishraDev Kant Mishra 0 Comments 8:25 am टहनियों पत्तियों से ओस है टपक रही, कुहासे से पटा हुआ, खेत-वन-बाग हैं। तन को गलाता तेज पछुआ पवन बहे,[...] और पढ़ेंऔर पढ़ें