बाल कुसुम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि-पद्यपंकज

बाल कुसुम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

Jainendra

बागों में कोयल बोले,कौआ बैठा डाल पर,
मोर भी मोहित हुआ, मोरनी की चाल पर।
मछली को मीन कहें, मगर मगर कौन ?
बच्चे सारे हँस पड़े, गुरु के सवाल पर।
बगुला भगत बना, मछली की आस में,
केकड़ा तरस खाता बगुले की चाल पर।
चेहरा कुरुप भला, संस्कार- ज्ञान देखिए,
तिल शोभा बढ़ा देता, सुंदरता गाल पर।
बिना गुण-ज्ञान नहीं, सम्मान कोई पाता है,
सियार भी मग्न बैठा, भेड़िए की खाल पर।
कभी कोई याद करे, क्यों गुजरे जमाने को ?
लोग भी दुआएं देते, सिर्फ नए साल पर।

जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
म. वि. बख्तियारपुर, पटना

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