रीढ़ देश की हैं मजदूर। नेह सुधा सुख दें भरपूर।। नित्य बहाते श्रम का स्वेद। मन में कभी न रखते भेद।। चाहे पथ हो या खलिहान। रखते हैं वे श्रम…
Author: Anupama Priyadarshini
सनातन धर्म – गिरीन्द्र मोहन झा
धर्म जिसे कहते हैं। वह सनातन, शाश्वत, परित: है। धर्म वह है, जिससे हो, सबका सर्वांगीण विकास। सद्गुणों को धारण करे, फैले उच्च आदर्श का उजास। सनातन धर्म सहिष्णुता, प्रेम,…
सुनो-सुनो मजदूर हूँ मैं – मनु कुमारी
सिर पर भारी बोझ उठाएँ। दर्द सहें पर न घबराएँ। दो जून की रोटी पर हीं , मन में रखता सबूर हूँ मैं। सुनो-सुनो मजदूर हूँ मैं।। संघर्ष की आग…
परशुराम जयंती- राम किशोर पाठक
दोहा छंद चार सनातन युग शुभद, करते ग्रंथ बखान। कालखंड सबके अलग, करे सभी गुणगान।।०१।। सतयुग का प्रस्थान था, त्रेतायुग तैयार। महिप सभी निरंकुश थे, करते अत्याचार।।०२।। शुक्ल पक्ष बैशाख…
अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस – राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी आमोद प्रमोद संग, मन में भरे उमंग, आह्लाद विनोद रंग, नृत्य कर लीजिए। तन मन झूम उठे, आलस्य भी रहे रूठे, योग सरिस अनूठे, कृत्य यह कीजिए। नृत्य…
जमीनी आदमी ठहरा – एस.के.पूनम
विधाता छंद। विनय से हाथ जो जोड़ा, झुकाया शीश भी अपना। लिए मुस्कान, हूँ हर्षित, रहा मैं देखता सपना।। सजग हैं भाव भी मेरे, मलिनता दूर है मन से। गुज़ारा…
आतंक एक नासूर – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
रुप घनाक्षरी छंद में सीमाओं की रक्षा हेतु, कुर्बानी भी देनी होगी, कभी नहीं अधिकार, माँगा जाता हाथ जोड़। बार-बार मरने से- अच्छा होगा खेत आना, डरकर भागता जो, कहलाता…
धरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठक
धरा विचार – मुक्तामणि छंद धरती कहती प्रेम से, सुनें प्यार से बातें। भूल अगर करते नहीं, आज नहीं पछताते।। भीषण गर्मी पड़ रही, काट रहे तरु प्यारे। पीने के…
दोहा – सुधीर कुमार
दोहा कुँवर सिंह मात्रा — २४ यति — १३,११ कुँवर सिंह के त्याग को , कैसे जाएँ भूल । देश भक्ति की राह में , सदा बिछाए फूल ।। जन्म…
समीक्षा लोग ही करते – एस.के.पूनम
विधाता छंद (1) कलम है पास में मेरे, सदा तैयार लिखने को। पटल पर खास शब्दों को, उकेरा है सिखाने को। निराशा में डगर बदली, पढ़ाया पाठ जीने का। मदय…