पिता – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”

पितृ दिवस पर आज सभी, करते पितृ को याद। पाकर आशीष पितृ से,होते खुश औलाद।। मात-पिता के स्थान का,करता जो नित ध्यान। बिन पोथी के ज्ञान ही,मिलता उसे सम्मान।। रहता…

विवाह वर्षगांठ – मनु कुमारी

मनहरण घनाक्षरी कवित्त छंद अचल सुहाग भाग, ईश्वर आशीष प्राप्त, पिया जी के साथ रहूँ,यही वर मांगती। भरे- पूरे रहें सब, मायका व ससुराल, सजल सुहाग भाग, दिन रैन चाहती।…

कसक किसानों की – एस.के.पूनम

🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण घनाक्षरी (कसक किसानों की) लालिमा के संग जागे, टोकरी उठाए भागे, ढूंढ रहे फलियों में,श्रमदान महानों की। पग धरे तप्त धरा, सूख गए बाग हरा, कृषक…

मनहरन घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

और कोई काम नहीं, मिलता आराम नहीं, थक हार कर थोड़ा, सूर्य अलसाया है। चलता हूँ जिस पथ, देखता हूँ लथपथ, थलचर-नभचर,घाम से नहाया है। सागर उबल रहा, पत्थर पिघल…

अमरों में नाम लिखा लेना – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति

चलते-चलते गर पग दुख जाय बैठ थोड़ा सुस्ता लेना। मगर धैर्य खोकर कभी तुम पग को पीछे ना हटा लेना। बढ़ जाय जो कभी असमंजस तो प्रभु का ध्यान लगा…