Author: Vijay Bahadur Singh

Madhumita

स्वयं की पहचान-मधुमितास्वयं की पहचान-मधुमिता

0 Comments 2:32 pm

स्वयं की पहचान क्या कभी पहचाना स्वयं को? कौन हैं हम? भूलकर स्वयं को आत्मा देहाभिमान में ढूंढे, कौन है[...]

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क्यों भूल गया-कुमकुम कुमारीक्यों भूल गया-कुमकुम कुमारी

0 Comments 2:00 pm

क्यों भूल गया क्यों भूल गया ऐ इंसान ये किराए का है मकान साँसे बेच-बेच कर किराया चुकाना है फिर[...]

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बची रहे मानवता-रानी कुमारीबची रहे मानवता-रानी कुमारी

0 Comments 1:36 pm

बची रहे मानवता कोरोना के कहर से हमने अनुभव यह पाया है धन-दौलत, पद, सत्ता का मोह बस भूल-भूलैया है।[...]

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मोक्ष की प्रतिक्षा-अवनीश कुमारमोक्ष की प्रतिक्षा-अवनीश कुमार

0 Comments 10:10 am

मोक्ष की प्रतीक्षा थक जाता जब मानव का तन मन ईश्वर से मोक्ष दिलाने को करता नमन लेकिन आत्मा है[...]

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प्रकृति-प्रियंका प्रियाप्रकृति-प्रियंका प्रिया

0 Comments 5:42 pm

प्रकृति हो व्याकुल मन की; व्यथित क्षुधा तुम, अमृत तुल्य; नीर सुधा तुम।। हे प्रकृति रुपी; ममता मयी, तू सदा[...]

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डरो मत तुम कोरोना भगाओ-मनु कुमारीडरो मत तुम कोरोना भगाओ-मनु कुमारी

0 Comments 3:27 pm

डरो मत तुम कोरोना भगाओ सखी सहेली भाई बहना, कोरोना से तुम यूँ डरो ना , भले ना बनी कोई[...]

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गाँधी को गढ़ना होगा-स्नेहलता द्विवेदी आर्यागाँधी को गढ़ना होगा-स्नेहलता द्विवेदी आर्या

0 Comments 1:46 pm

गाँधी को गढ़ना होगा मानवता के मनोभाव को निर्मल से करने के लिए, मधुर जीवन के सरस भाव को अमृतमय[...]

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श्री गुरु महिमा-शुकदेव पाठकश्री गुरु महिमा-शुकदेव पाठक

0 Comments 12:23 pm

श्री गुरु महिमा गुरु आत्मा, गुरु परमात्मा गुरु है ओम्, गुरु ही व्योम गुरु निवारण, गुरु जगतारण गुरु का सम्मान[...]

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