स्वयं की पहचान क्या कभी पहचाना स्वयं को? कौन हैं हम? भूलकर स्वयं को आत्मा देहाभिमान में ढूंढे, कौन है[...]
Author: Vijay Bahadur Singh
क्यों भूल गया-कुमकुम कुमारीक्यों भूल गया-कुमकुम कुमारी
क्यों भूल गया क्यों भूल गया ऐ इंसान ये किराए का है मकान साँसे बेच-बेच कर किराया चुकाना है फिर[...]
बची रहे मानवता-रानी कुमारीबची रहे मानवता-रानी कुमारी
बची रहे मानवता कोरोना के कहर से हमने अनुभव यह पाया है धन-दौलत, पद, सत्ता का मोह बस भूल-भूलैया है।[...]
मोक्ष की प्रतिक्षा-अवनीश कुमारमोक्ष की प्रतिक्षा-अवनीश कुमार
मोक्ष की प्रतीक्षा थक जाता जब मानव का तन मन ईश्वर से मोक्ष दिलाने को करता नमन लेकिन आत्मा है[...]
प्रकृति-प्रियंका प्रियाप्रकृति-प्रियंका प्रिया
प्रकृति हो व्याकुल मन की; व्यथित क्षुधा तुम, अमृत तुल्य; नीर सुधा तुम।। हे प्रकृति रुपी; ममता मयी, तू सदा[...]
जल की बूंदें-स्वाति सौरभजल की बूंदें-स्वाति सौरभ
जल की बूंदे मचल रही थी जमीं से ही, उठने को ऊपर की ओर राह देख रही थी सूरज का,[...]
डरो मत तुम कोरोना भगाओ-मनु कुमारीडरो मत तुम कोरोना भगाओ-मनु कुमारी
डरो मत तुम कोरोना भगाओ सखी सहेली भाई बहना, कोरोना से तुम यूँ डरो ना , भले ना बनी कोई[...]
गाँधी को गढ़ना होगा-स्नेहलता द्विवेदी आर्यागाँधी को गढ़ना होगा-स्नेहलता द्विवेदी आर्या
गाँधी को गढ़ना होगा मानवता के मनोभाव को निर्मल से करने के लिए, मधुर जीवन के सरस भाव को अमृतमय[...]
श्री गुरु महिमा-शुकदेव पाठकश्री गुरु महिमा-शुकदेव पाठक
श्री गुरु महिमा गुरु आत्मा, गुरु परमात्मा गुरु है ओम्, गुरु ही व्योम गुरु निवारण, गुरु जगतारण गुरु का सम्मान[...]
विवसता-रुचि सिन्हाविवसता-रुचि सिन्हा
विवशता प्रकृति ने गजब रौद्र रूप अपनाई है , एक तरफ है कुंआ तो दूसरी तरफ खाई है । हे[...]
