Author: Vijay Bahadur Singh

जिंदगी का सार-संगीता कुमारी सिंहजिंदगी का सार-संगीता कुमारी सिंह

0 Comments 12:00 pm

जिंदगी का सार यूं ही कभी आसमाँ को निहारते, देखा मैंने, शाम के धुंधलके में, चाँद का निकलना, शुभ्र, धवल,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

कैद हो गई जिन्दगी-प्रीति कुमारीकैद हो गई जिन्दगी-प्रीति कुमारी

0 Comments 11:12 am

कैद हो गई जिन्दगी  कैद हो गई जिन्दगी, यूँ ही समय व्यतीत हो रहा, ऐसा लगता है मानो, दुर्गम है[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

तन माटी का एक खिलौना-रानी सिंहतन माटी का एक खिलौना-रानी सिंह

0 Comments 9:54 am

तन माटी का एक खिलौना जन्म-मरण का फेरा यारों चलता बारंबार यहाँ तन माटी का एक खिलौना टूटा कितनी बार[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

नौनिहाल भारत माँ के-अंजलि कुमारीनौनिहाल भारत माँ के-अंजलि कुमारी

0 Comments 11:42 am

नौनिहाल भारत माँ के नौनिहाल भारत माँ के विद्यालय में पढ़ने आते हैं । बनकर पथप्रदर्शक हम शिक्षक उनका भविष्य[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

चेतावनी-संजीव प्रियदर्शीचेतावनी-संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 10:31 am

चेतावनी अभी जाकर अहसास हुआ है अपनी औकात एक अदना-सा विषाणु अपनी गिरफ्त में ले लेने को उतारु है उस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Manu

शून्य में भी शब्द तुम हो माँ-मनु कुमारीशून्य में भी शब्द तुम हो माँ-मनु कुमारी

0 Comments 3:45 pm

शून्य में भी शब्द तुम हो माँ  तुम सा कोई नहीं इस जहाँ में, तुम हो ममता की मूरत। मेरे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें