शीतलहर
सर्द हवा की कहर,
चल रही शीतलहर।
गात को कंपा रहा,
दीन को सता रहा,
सूना पड़ा है डगर।
सर्द हवा की कहर,
चल रही शीतलहर।
छाया घना कोहरा,
किसान खेत में मगर,
ठंड से बचा रहा अनल।
सर्द हवा की कहर,
चल रही शीतलहर।
सूरज का आभा हुआ कल्पना,
धरा पर बिछा ओस की चादर,
कप- कपा रहा बदन।
सर्द हवा की कहर,
चल रही शीतलहर।
ब्यूटी कुमारी,
प्रधान शिक्षक
प्रा.वि. ज्याजपट्टी,
दलसिंहसराय ,समस्तीपुर
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