और हम छूट गए तुम चले गए पर हम छूट गए। वक्त बीत गया पर हम छूट गए। सुनी पड़ी आँखों से, भरे हुए दिल से, तुम्हे बिदा किया पर…
Category: काव्यांजलि
ख्वाब-श्री विमल कुमार
वो ख्वाब था एक सपना था एक हकीकत था एक यादगार था। एक तेज आंधी आयी तूफान की झोंका आयी जीवन के सपनों को मरोड़ गयी सपना चकनाचूर हो गयी।…
श्रद्धा सुमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि
तिनका तिनका जोड़ कर टी ओ वी सा महल बनाया। अपने शब्द,स्नेह और ज्ञान से शिक्षकों ने इसे सजाया।। नाम, चेहरा, कर्म से हम एक- दूसरे से थे अनजान। विवेक,…
खौफ-सीमा संगसार
झांकती हुई दो सूनी आंखों में खौफ नहीं जीवन जी लेने की तत्परता है दोनों कानों पर झूलता हुआ बित्ते भर का कपड़ा कफन की तरह पसरा हुआ है इन…
अपना भेज के अंतिम संदेश-रमेश कुमार मिश्र
अपना भेज के अंतिम संदेश,छोड़ के अपना देश, परदेश तुम चले गए,परदेश क्यों चले गए बदल के अपना भेष,खुश रहने का दे संदेश,कहो न क्यों चले गए,कहो ना क्यों छोड़…
एक श्रद्धांजलि-गिरिधर कुमार
वह बरगद, वह बरगद की छांव… सभी के लिए स्वीकार मन में, सभी के लिए प्यार मन में, वह छांव नहीं है अब! …है, अब भी है, हर शिक्षक शिक्षार्थी…