ऋतु कुसुमाकर-राम किशोर पाठक

लाना फूलों की सब माला। ऋतु कुसुमाकर आने वाला।। गुरुवर सबको बोल रहे हैं। राज सभी से खोल रहे हैं।। सजने वाला अपना शाला। ऋतु कुसुमाकर आने वाला।।०१।। पूजा होगी…

कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान सुधीर छोड़ते निशान हैं। भारतीय लोग हैं विचारवान पुण्यवान, देश में यहाॅं-वहाॅं नई-नई उड़ान हैं। देश में विदेश में जहाॅं मिले विशेष ज्ञान,…

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को। कटीली झाड़ियों में से, निकाले थे कभी मग को।। अभावों…

दुनिया दौलत वालों की – मनहरण घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

दुनिया दौलत वालों की मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१ किसी को तो दूध-भात मक्खन सुहाता नहीं, किसी को नमक-रोटी, मिलता न थाली में। किसी को तो भर पेट मिलता भोजन नहीं,…

सर्दी का असर. .भावानंद सिंह

—- धनाक्षरी छंद ————————-शीत का असर देखो,सब  पे  बराबर  है,बिछावन पर दुबके, ओढ़े कम्बल है। सर्द हवा चल रही,ठिठुर रहा तन है,हो रहा बचाव उनका,जो सबल है। दिन दीनों के…

माँ शारदे-राम किशोर पाठक

धरणी छंद वर्णिक माँ शारदे, दया दिखलाओ। दे बुद्धि को, कृपा बरसाओ।। कोई कहे, तुम्हें बलशाली।मानें सदा, तुम्हें सब काली।।माता हमें, सही समझाओ।माँ शारदे, दया दिखलाओ।।०१।। कैसे कहूँ, नहीं कुछ…

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक सभी लोग हैं काँपते, सर्दी सबको खल रही। फैल गया है कोहरा, दृष्टि सभी की छल रही।। मुश्किल होता देखना, आस-पास…

शहादत गीत- महा-शशिवदना छंद – राम किशोर पाठक

शहादत गीत- महा-शशिवदना छंद – राम किशोर पाठक जुल्म विरोधी हूँ, सत्य बताता हूँ। गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।। शासक मुगलों के, किए अत्याचार थें। खत्म हुए कितने, सभ्य…