Category: छंद

ram किशोर

चिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठकचिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठक

0 Comments 9:33 pm

अंधाधुंध वन कटने लगे, चलने लगी कुल्हाड़ियाँ। होने लगा विनाश वनों का, थी शहर की तैयारियाँ। राजस्थान जहॉं पहले हीं,[...]

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ram किशोर

केसर हो जाइए- विधा- मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठककेसर हो जाइए- विधा- मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक

0 Comments 8:23 pm

इस बार की होली में, मधु रस हो बोली में, प्रेम लाली ले झोली में, गले से लगाइए। लाल पीले[...]

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:33 pm

दिवस राष्ट्र विज्ञान का, लाया नव उल्लास। रमण खोज की याद कर, उर में भरें उजास।। चिंतन कर विज्ञान का,[...]

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ram किशोर

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठकराष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठक

0 Comments 8:51 pm

हम करें विज्ञान की बातें, देश के उत्थान की बातें। विज्ञान और नवाचार में, युवाओं को सशक्त बनाना। राष्ट्रीय विज्ञान[...]

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शीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरीशीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरी

0 Comments 3:40 pm

निरख सुहानी भोर, सुखद विहंग शोर, प्राणवायु का सहर्ष, अनुभव कीजिए। ललित प्राची की लाली, भृंगी बाग मतवाली, भीनी गंध[...]

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ram किशोर

शिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठकशिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठक

0 Comments 7:01 pm

प्रकृति वधू का रूप ले, पुलकित रही निहार। पुरुष प्रकृति का है मिलन, मन में लिए विचार।। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी,[...]

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दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:39 pm

गिरिजापति भूतेश शिव, आया हूँ दरबार। विनती बारंबार है, करिए बेड़ा पार।। अंतक अक्षय आप हो, उमापति विश्वनाथ। नीलकंठ शिवमय[...]

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Amarnath Trivedi

सच में जीवन जीना सीखें – अमरनाथ त्रिवेदीसच में जीवन जीना सीखें – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 10:05 pm

रोते को  हँसाना  सीखें, जग में नाम कमाना सीखें।   कभी न झगड़ा झंझट करें, दिल खुशियों से भरा करें। मन से दुख[...]

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ram किशोर

मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक

0 Comments 9:54 pm

आधार का वर्ग मान, लंब का भी वर्ग ज्ञान, दोनों के योगफल को, ज्ञात कर लाइए। तीसरी भुजा कर्ण लें,[...]

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ram किशोर

रूप घनाक्षरी – रामकिशोर पाठकरूप घनाक्षरी – रामकिशोर पाठक

0 Comments 10:35 am

अनुपयोगी का साथ, हानिकारक का हाथ, प्रदूषण कहलाता, बिगड़ जाता है काज। भूमि जल वायु संग, ध्वनि प्रकाश का ढंग,[...]

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