बुलाते हैं प्यारे, सकल जन राजा भजन में। अधोगामी सारे, सहज तर जाते शरण में।। पिता आज्ञा से जो, गहन[...]
Category: Atmakatha
एक दिन का सम्मान या हमेशा?एक दिन का सम्मान या हमेशा?
“एक दिन का सम्मान या हमेशा?” “मैं शिक्षक हूँ — और यह मेरी कहानी है” मैं शिक्षक हूँ… हाँ, वही[...]
टीचर्स ऑफ बिहार : नवचेतना का उद्घोष-मनु कुमारीटीचर्स ऑफ बिहार : नवचेतना का उद्घोष-मनु कुमारी
जब शिक्षा को मिला नव संबल, जब शिक्षक को पहचान मिली, बीस जनवरी का वह पावन दिन, नव इतिहास की[...]
मैं हिन्दी हूॅं-प्रियंका दुबेमैं हिन्दी हूॅं-प्रियंका दुबे
मैं हिन्दी हूॅं वर्षों पुराने इतिहास के पन्नों में, दर्ज है मेरे अस्तित्व की कहानियाँ, शिशु हूॅं मैं संस्कृत है[...]
कागज़ की आत्मकथा-एस. के. पूनमकागज़ की आत्मकथा-एस. के. पूनम
कागज़ की आत्मकथा मेरा जन्मभूमि चीन कहलाता है, मुझे माह, तारीख तो याद नहीं है, पर हाँ! वर्ष 201 ई.पू.[...]
