स्व-रचित – कविता मत छीनो बचपन – बाल विवाह 1. नन्हीं सी गुड़िया है, बागों की कलियाँ है। हुआ न बचपन पूरा है, यौवन अभी अधूरा है। 2. कांच कली…
Category: Hall of Fame January 2026
| मैं शिक्षक हूँ |
स्व-रचित -कविता मैं शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ, हाँ मैं शिक्षक हूँ, राष्ट्र का निर्माता हूँ, ज्ञान का दाता हूँ, हां मैं शिक्षक हूँ। मैं मिट्टी हूँ, पर सोना गढ़ता…
युवा ही है देश की शान – मृत्युंजय कुमार
युवा है हम देश की शान, रखेंगे हम इसका मान। आओ मिलकर कुछ ऐसा काम करें, देश दुनिया में अपना नाम करें। देश की खातिर अपनी जान, जरूरत पड़ी तो…
Primary Teacher
“अभी ना ब्याह रचाओ मां “ अभी ना ब्याह रचाओ मां…. मुझे पढ़ लिख जाने दो अपने पैरों पर खड़ी होकर, मुझे कुछ बन जाने दो। अभी ना ब्याह रचाओ…
दियौ बच्चा केअ छुट्टी सरकार यौ – नीतू रानी
दियौ केअ छुट्टी सरकार यौ, नै तेअ बच्चा सब बच्चापड़त बीमार यौ। आय तेअ सबसेअ बेसी येअ ठंडा धूप एखैन यहाँ बड़ येअ मंदा, ठंडा सेअ हालत येअ हमर खराब…