दो जून की रोटी किस्मत से नसीब होती है दो जून की रोटी। चहुँ ओर कोरोना हाहाकार मचाये दुनिया है[...]
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विवसता-रुचि सिन्हाविवसता-रुचि सिन्हा
विवशता प्रकृति ने गजब रौद्र रूप अपनाई है , एक तरफ है कुंआ तो दूसरी तरफ खाई है । हे[...]
गांधारी का विलाप-दिलीप कुमार चौधरीगांधारी का विलाप-दिलीप कुमार चौधरी
गांधारी का विलाप महाभारत का हुआ था अंत ; मचा था हाहाकार दिग्दिगंत । रण-भूमि में बिखरी थीं लाशें[...]
संभव नहीं – ब्रजराज चौधरीसंभव नहीं – ब्रजराज चौधरी
संभव नहीं छोड़ दें हर कुछ बस अपनी ही खुशी के लिए ये तो संभव ही नहीं है ,हर[...]
रोटी-प्रियंका प्रियारोटी-प्रियंका प्रिया
रोटी इस दो जून की रोटी की खातिर नीयत करते सब खोटी, वाकई रोटी चीज नहीं छोटी।। क्या कहूँ इस[...]
कुदरत-प्रीति कुमारीकुदरत-प्रीति कुमारी
कुदरत कुदरत तेरे रंग हजार, इस जीवन रूपी नैया का, है तू ही खेवनहार। कुदरत तेरे रंग हजार। कभी तू[...]
गोरैया की आत्म व्यथा-अपराजिता कुमारीगोरैया की आत्म व्यथा-अपराजिता कुमारी
गौरैया की आत्मव्यथा मैं हूँ चुलबुली सी गौरैया स्थिर नहीं मैं रह पाती हूंँ, चहक चहक कर फुदक फुदक कर[...]
समय-जैनेन्द्र प्रसाद रविसमय-जैनेन्द्र प्रसाद रवि
समय हवा शुद्ध है फिर भी हम, मास्क आज लगाते हैं। खाली सड़कें रहने पर भी, ड्राइव पर नहीं निकल[...]
किसान-सूर्यप्रकाशकिसान-सूर्यप्रकाश
किसान धरती है मेरी माता, पिता को माना आसमान, है मेरी यही परंपरा, है मेरी यही शान I हाँ मै[...]
