चंचल वन में कोरोना चंचल वन में आया कोरोना, भूल गए सब खेल खिलौना। बंदर मामा को हुआ बुखार, डूबा चिंता में जंगल परिवार। डाल डाल पर कूदा फानी, करते…
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चूहे की चतुराई-सुधीर कुमार
चूहे की चतुराई एक बार दो बिल्ली ने मिल, एक चूहे को पकड़ा। उनके चंगुल से छूट न सका, लाख किया वह रगड़ा। तब चूहा बोला कि सुन लो, बात…
बिल्ली रानी बिल्ली रानी-मधु कुमारी
बिल्ली रानी बिल्ली रानी बिल्ली रानी, बिल्ली रानी चुपके चुपके आती हो जरा सी आंखें जो बन्द कर लूं तो, सारे दूध पल में चट कर जाती हो। कितनी नटखट…
सच्चे मित्र-सुधीर कुमार
सच्चे मित्र पौधे हमारे मित्र हैं सच्चे, इनको न तू भूल। इनसे ही है हरियाली, और मानव जाति समूल। आम, संतरा, केला, नारियल, सेब, अमरुद, अंगूर। ये सारे ही फल…
दिशा धुन-डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
दिशा धुन प्यारे बच्चों सुन सुन सुन, दिशा की प्यारी सी इक धुन। सूरज जिधर से सुबह उगे, कहते उसको पूरब सुन। प्यारे बच्चों सुन सुन सुन.. देखो सुबह में…
चिड़ियों का स्कूल-अनुभव राज
चिड़ियों का स्कूल देखो अजब अनोखा प्यारा चिड़ियों का स्कूल खुला गजब जंगल में न्यारा चिड़ियों का स्कूल। बन्दर ढोल बजाता आया घर घर यह समझाया छोटी नन्हीं चिड़ियों को…
चूहा जब गया मेला-कुमारी अनु साह
चूहा जब गया मेला एक चूहा बडा ही अलबेला घूमने जा रहा था मेला चुहिया से बोला वही सूट बूट निकाल दो जिसे सेठ के घर से लाया था वो…
तितली-प्रीति कुमारी
तितली रंग बिरंगी आई तितली सबके मन को भाई तितली, सुन्दर-सुन्दर पंखों वाली ढेरों खुशियाँ लाई तितली । लाल पीली हरी नीली भूरी भूरी काली काली छोटी-छोटी आँखों वाली मनमोहक…
भारतीय रेल और मेरी वाराणसी की यात्रा- मनोज कुमार दुबे
भारतीय रेल और मेरी वाराणसी की यात्रा ये रेल भी यार मजेदार होती है मानो तो पूरा हिंदुस्तान होती है ! एक बार बलिया से शुरू हुई मेरी यात्रा भाई…
एक गिलहरी-निधि चौधरी
एक गिलहरी बड़े पेड़ पर एक गिलहरी, उसे बुलाते सभी सुनहरी। जन्म जब यह लेती है, आँखों से अंधी होती है। धीरे धीरे बढ़ती जाती, फिर दुनियाँ देख पाती। झाड़ियों…