एक गिलहरी-निधि चौधरी

एक गिलहरी बड़े पेड़ पर एक गिलहरी, उसे बुलाते सभी सुनहरी। जन्म जब यह लेती है, आँखों से अंधी होती है। धीरे धीरे बढ़ती जाती, फिर दुनियाँ देख पाती। झाड़ियों…

दिवाली-निधि चौधरी

दीवाली चंचल वन में मनी दीवाली, घनी अंधेरी रात थी काली। चंपू खरगोश दिमाग लड़ाया, जुगनू की टोली बुलवाया। जगमग जगमग जुगनू चमके, खाई मिठाईयाँ सबने जमके। किसी ने पटाखे…

एक सपेरा-निधि चौधरी

एक सपेरा देखो देखो आया है एक सपेरा, आंगन के बाहर है डाला डेरा। ठुमक ठुमक के नाचे नागिन, बीन बजा के नचवाए सपेरा। खेल छोड़ कर बच्चों आओ, देख…

चंदा मामा-मधु कुमारी

चंदा मामा देखो बच्चों निकला आसमां में चंदा मामा लगता देखो कितना प्यारा देती अपनी शीतल छाया तारों का वो राज दुलारा रौशन करता जग सारा चंदा मामा, चंदा मामा…

दिनों के नाम-निधि चौधरी

दिनों के नाम सोमवार को चले स्कूल मंगलवार खिल गए फूल। बुधवार को आई नानी, गुरुवार हम सुने कहानी। शुक्रवार को लगे बाज़ार, शनिवार छुट्टी का इंतज़ार। आया प्यारा प्यारा…

क्रिकेट-निधि चौधरी

क्रिकेट जंगल में बंदर जी बोले चलो आज क्रिकेट खेलें। सबने इसमे सहमती जताया अंपायर हाथी को बनाया। बैटिंग करने गधा आया, पहले बॉल में कैच उड़ाया। बल्ला ले कर…