हमारे मुंशी प्रेमचंद (जयंती विशेष) साहित्यिक आकाश में,उगा एक दिव्य चंद्र , और कोई नहीं वो , हमारे मुंशी प्रेमचंद![...]
Category: padyapankaj
Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.
सोए को जगाइए – एस.के.पूनमसोए को जगाइए – एस.के.पूनम
कलम के सौदागर, प्रमाण लेकर आज, जगत के सम्मुख खड़े,होकर दिखाइए। पन्ना-पन्ना भर गया, गहन चिंतन शोध, तिमिर को भेद[...]
रूपघनाक्षरी – एस.के.पूनमरूपघनाक्षरी – एस.के.पूनम
संग्राम क्यों होते रहे, संघर्ष है विचारों की, अहंभाव समाहित,मन करे परेशान। केवल मानव नहीं, प्रकृति के कण-कण, द्वंदवाद से[...]
धान की बुआई – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’धान की बुआई – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मिलके लुगाई संग धान की बुवाई करें, फसल उगाने हेतु किसान लगाता जोर। हल उठा काँधे पर खेतों की जुताई[...]
बाल कविता – एस.के.पूनमबाल कविता – एस.के.पूनम
बाल मन कहाँ रुके, कहीं नहीं वह झुके, खेल खेले मस्त-मस्त,होए न पस्त कभी। नदी तीर रोज जाते, बालू से[...]
बेबस इंसान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बेबस इंसान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
रूप घनाक्षरी छंद पानी हेतु किसानों की नजरें तरस रहीं, धूल उड़े सावन में देख रहे आसमान। नमी बिना खेतों[...]
मनहरण – एस.के.पूनममनहरण – एस.के.पूनम
पहले भी छोड़ा यान, पहुँचा चँद्रमा पर, भटका था वह राह,गुमनामी में खोया। भारत की गरिमा का, इतिहास है पुराना,[...]
बरखा बहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बरखा बहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बरखा बहार आई मन में उमंग छाई, मोती जैसे आसमान झमाझम बरसे। नई – नई दूब उगी, फसल की आस[...]
प्रकृति के आगे लाचार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रकृति के आगे लाचार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
छंद -रूप घनाक्षरी अचानक मौसम ने बदला है करवट, आज सारे जीव जंतु गर्मी से गए हैं हार। पसीने से[...]
दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
दीप जलाकर ज्ञान का, करिए गुरु का गान। चरण शरण रहकर सदा, तजिए निज अभिमान।। गुरुवर प्रतिदिन शिष्य को, देते[...]
