घनाक्षरी”मेरी कामना” – एस.के.पूनम

जाग कर प्रातःकाल,निकलूँ अकेले राह, मेरे दोनों चक्षुओं में,भरे कई रंग हैं। मृदुल झंकार सुन,नव अनुराग चुन, मन पुलकित होता, जीने का ये ढ़ंग है। उस पथ को मैं चला,जहाँ…

पुस्तक मेला – नीतू रानी

रेणु उद्यान में पुस्तक मेला लगा है चलो हम सब करें पुस्तक दान, हर पंचायत में हो एक पुस्तकालय पढ़ेंगे वहाँ बच्चे बूढ़े जवान। राहुल कुमार डीएम साहब के द्वारा…

पुस्तक सच्ची मित्र हमारी -मीरा सिंह “मीरा”

भला बुरा सबको समझाती हल्का करती हर दुख भारी। हाथ पकड़कर राह दिखाती पुस्तक सच्ची मित्र हमारी।। हर बाधा से हमें बचाती यह जीने का हुनर सिखाती। जब गहराता गहन…

हमें नहीं अब युद्ध चाहिए- संजय कुमार

हमे नहीं अब युद्ध चाहिए, नहीं हमे अब युद्ध चाहिए, संघर्ष नहीं विराम चाहिए। सत्य अहिंसा विश्व बंधुता करुणा मित्र और प्यार चाहिए। नहीं और अब युद्ध चाहिए। अहं और…

मनहरण घनाक्षरी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

प्राण संग दुनिया से कर्म धर्म साथ जाते, केवल मानव तन जलता है आग़ में। दीप संग तेल जले परवाना गले मिले, वर्तिका में छिपी होती रोशनी चिराग में। अज्ञानी…