राष्ट्रप्रेम की भावना राष्ट्रप्रेम की भावना केवल युद्ध भूमि में ही नहीं होनी चाहिए, इसकी शुरुआत हमें अपने नेक इरादों से करनी चाहिए, ना भेदभाव हो, ना कोई जाति-धर्म का…
Category: Prem
Love has no definition, and it is a feeling that comes within the heart. The meaning of love can be different for different people, different age groups, and different relationships, but the surface is the same for everyone. Love comes from knowledge, and for this, one needs to understand oneself.
ये मेरा घर-मनु कुमारी
ये मेरा घर कितना प्यारा, ये मेरा घर, रहते यहाँ हम, हिलमिल कर। कितना सुन्दर, कितना मनहर, है अपना, ये मेरा घर। मम्मी-पापा, दादा-दादी, भाई-बहन, और चाचा-चाची। सब मिल रहते…
प्रकृति-अर्चना गुप्ता
प्रकृति प्रकृति की प्रवृत्ति आदिकाल से ही निश्छल सहज और सौम्य रही है करती रही है चिरकाल से सबकी तृष्णाओं को तृप्त प्रवाहित होती रही है सदा स्थूल जगत में…
धमाचौकड़ी-रुचि सिन्हा
धमाचौकड़ी बच्चों के मन को हरसाई, चीं-चीं करती चिड़ियां आई। देख नजारा चिड़ियों का, चिंटू ने आवाज लगाई। सुन लो बहना सुन लो भाई , चीं-चीं करती चिड़ियां आई। शोर-शराबा…
ये बेटियाँ- मधु कुमारी
ये बेटियाँ बेटियाँ उन्मुक्त नदियों की लहरों-सी मदमस्त हवा के ठण्डे झोंकों-सी चहकती, दमकती, मदमस्त छबिली-सी छन-छन के सुरीली गीतों-सी रिश्तों के नाजुक डोर-सी परम्परा निभाती फ़रिश्ते-सी एक मजबूत किंतु…
वे स्वर्णिम दिन-अवनीश कुमार
वे स्वर्णिम दिन वे भी क्या स्वर्णिम दिन थे जब सारी शिक्षा गुरु चरणों में मिल जाया करती थी वेद वेदांग, उपनिषद, ऋचा, ऋचाएँ योग, तंत्र, मंत्र, भूगोल, खगोल की…
मेरा नाम बिहार हुआ-एम एस हुसैन
मेरा नाम बिहार हुआ 1912 में मैं पैदा हुई जन्म स्थल बंगाल हुआ लोगों से मैं मिली जुली इसी तरह मेरा प्रचार हुआ मेरे पास बहुत बौद्ध भिक्षु रहते हाँ…
बचपन का वो जमाना-एम एस हुसैन
बचपन का वो जमाना आता है याद मुझको बचपन का वो ज़माना । कॉपी किताब लेकर घर से स्कूल जाना ।। उस वक्त की शोखियाँ भी थी अजब निराली ।…
देशी मिट्टी के सुगंध-भवानंद सिंह
देशी मिट्टी के सुगंध देश हमारा हमें है प्यारा इसकी खुश्बू को पहचाने, इस मिट्टी में पले बढे हम आज खड़े हैं सीना ताने । कसम हमें है इस मिट्टी…
नन्हें बच्चे-लवली वर्मा
नन्हें बच्चे बच्चों से तो समस्त संसार है, समाहित इनमे ज्ञान का भंडार है। होते हैं ये अत्यंत भोले, सम्मुख सबके अपने राज खोले। चंचलता की ये तो मूरत…