मानव तन-विजय सिंह नीलकण्ठ

मानव तन मानव तन होता है नश्वर  जिसे बनाया सबके ईश्वर  काली मंदिर है दक्षिणेश्वर  सबसे ऊपर हैं परमेश्वर।  करें इसका सब सदुपयोग  न करना है दुरुपयोग  सदुपयोग से स्वास्थ्य…

जनसंख्या-संयुक्ता कुमारी

जनसंख्या जागो मानव जागो …. करो परिवार सीमित सभी। नहीं तो सभ्य समाज न बना पाएँगे, खो देंगे हम चैन अपनी। बड़ी विस्फोटक है यह समस्या, बेरोजगारी और बढ़ेगी। जागो…

संगत-रानी कुमारी

संगत भावपूर्ण शब्दों के संगत से रचता है गीत। सुर, ताल और लय के संगत से सजे मधुर संगीत। खाली दीया का भाई मोल नहीं कुछ खास। तेल-बाती के संगत…

संकल्प-प्रियंका कुमारी

संकल्प आज विद्यालय, मन में संकल्प लेकर जाएँगे मिलकर सभी शिक्षा को पूरी तरह से फैलाएँगे आशा की इस दीपक को मिलकर सभी जलाएँगे हर कोने-कोने में शिक्षा की नई…

मन की अभिलाषा-नरेश कुमार निराला

मन की अभिलाषा हिन्दुस्तान का कलमकार हूँ लिखने की जिज्ञासा है, भारत फिर से बने विश्व गुरू मन में यह अभिलाषा है। पूरब-पश्चिम उत्तर-दक्षिण चारों ओर खुशहाली हो, बाग-बगीचा वन-उपवन…

प्रकृति-मधु कुमारी

प्रकृति प्रकृति ने सजाया अद्भुत मेला लगे धरती भी जिससे अलबेला दिखे अम्बर कभी लाल, नीला तो कभी पीला। अजब गजब हैं करतब रचाते जादूगर हो जैसे खेल दिखाते सूरज,…