मानव तन मानव तन होता है नश्वर जिसे बनाया सबके ईश्वर काली मंदिर है दक्षिणेश्वर सबसे ऊपर हैं परमेश्वर। करें इसका सब सदुपयोग न करना है दुरुपयोग सदुपयोग से स्वास्थ्य…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
जनसंख्या-संयुक्ता कुमारी
जनसंख्या जागो मानव जागो …. करो परिवार सीमित सभी। नहीं तो सभ्य समाज न बना पाएँगे, खो देंगे हम चैन अपनी। बड़ी विस्फोटक है यह समस्या, बेरोजगारी और बढ़ेगी। जागो…
संगत-रानी कुमारी
संगत भावपूर्ण शब्दों के संगत से रचता है गीत। सुर, ताल और लय के संगत से सजे मधुर संगीत। खाली दीया का भाई मोल नहीं कुछ खास। तेल-बाती के संगत…
भारतीय किसान-रीना कुमारी
भारतीय किसान देखो ये हैं भारतीय किसान, जो करते खेतों में दिन भर काम, नहीं कभी भी है इन्हें आराम, देश का करे ये रौशन नाम, इनकी है एक अलग…
किसानों के कार्य-प्रमोद कुमार
किसानों के कार्य किसानों का कार्य भी समझ में आएगा, एक बार फसल उगाकर तो देखो। कभी तप्ती गर्मी के धूप में तो कभी ठंड भरी शीतलहर के जाड़े में,…
संकल्प-प्रियंका कुमारी
संकल्प आज विद्यालय, मन में संकल्प लेकर जाएँगे मिलकर सभी शिक्षा को पूरी तरह से फैलाएँगे आशा की इस दीपक को मिलकर सभी जलाएँगे हर कोने-कोने में शिक्षा की नई…
मन की अभिलाषा-नरेश कुमार निराला
मन की अभिलाषा हिन्दुस्तान का कलमकार हूँ लिखने की जिज्ञासा है, भारत फिर से बने विश्व गुरू मन में यह अभिलाषा है। पूरब-पश्चिम उत्तर-दक्षिण चारों ओर खुशहाली हो, बाग-बगीचा वन-उपवन…
वीर सपूत-नूतन कुमारी
वीर सपूत अब उठो देश के वीर सपूतों, जग में कुछ ऐसा काम करो, चहुँ ओर फैले ख्याति तुम्हारी, उठो! न तुम आराम करो। कर्म से पहले फल नहीं मिलता,…
परिवार की छाँव-प्रियंका प्रिया
परिवार की छाँव जिस तरह वृक्ष को जड़ जोड़ कर रखता है उसी तरह परिवार रिश्तों को बेजोड़ रखता है। जिस तरह धूप में ढूंढ़े फिरे ठाँव, उसी तरह जरुरी…
प्रकृति-मधु कुमारी
प्रकृति प्रकृति ने सजाया अद्भुत मेला लगे धरती भी जिससे अलबेला दिखे अम्बर कभी लाल, नीला तो कभी पीला। अजब गजब हैं करतब रचाते जादूगर हो जैसे खेल दिखाते सूरज,…