कक्षा का अमृत रस कक्षा तो कक्षा है, इसमें उपस्थित रहा करो। हो रहे वितरण ज्ञान का, बस अमृत रस पीया करो।। बस अमृत रस पीया करो। चूकुर-भूकुर सौगात है…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
गीत नया गाया था उन्होंने-निधि चौधरी
गीत नया गाया था उन्होंने टूटे तारों से भी बासंती स्वर निकाला था, जीवन का कण कण भारत माँ पर वारा था, काल के कपाल पर उसने लिख लिख मिटाया…
जग में महान है नारी-सच्चिदानंद कुमार सिंह
जग में महान है नारी सृष्टि की अद्भुत खोज है, झलकती उसमें ओज है, सजा है उसी से संसार सारा, बन जननी सबको धारा, प्रत्यक्ष की प्रमाण है नारी, जग…
जश्न ए आजादी-स्वाति सौरभ
जश्न ए आजादी हर नारी को सम्मान दे पाएं परंपराओं की बेड़ियां तोड़वाएं बेटियों को सशक्त बनाएं अपनी सुरक्षा खुद कर पाएं अस्मिता पर कोई आंच न आए देश में…
दहेज-निधि चौधरी
दहेज दहेज की अग्नि में जलते पिता की, सुनाने हूँ आई कहानी सिसकती। पिता बिटिया की हो गई है पक्की सगाई, कि लाखों में’ हमने खरीदी जमाई। थी खेती पुरानी…
मुनिया-निधि चौधरी
मुनिया पढ़ेगी मुनिया बढ़ेगी मुनिया, जग को रौशन करेगी मुनिया। घरों की है लक्ष्मी, सहेजो सँवारो, सफलता की सीढ़ी चढ़ेगी मुनिया। ज़रा-सी उड़ानें भरे जो ज़माना, परिंदों-सी फिर तो उड़ेगी…
बालक मन-एकलव्य
बालक मन गिरता है गिरने भी दो उतरता है उतरने दो, रोको मत! क्या पता झरना बनकर नदियों का उद्गम कहलाए। बहता है बहनें भी दो नदियां बन जीने भी…
प्रकृति-अर्चना गुप्ता
प्रकृति प्रकृति की प्रवृत्ति आदिकाल से ही निश्छल सहज और सौम्य रही है करती रही है चिरकाल से सबकी तृष्णाओं को तृप्त प्रवाहित होती रही है सदा स्थूल जगत में…
अत्याचार-प्रभात रमण
अत्याचार माता की ममता हार गई हारा पिता का प्यार है भाई का स्नेह भी हार गया बहन तो सर का भार है ये कैसा अत्याचार है ? जो घर…
बेटी-प्रभात रमण
बेटी बीजों को कोंपल बनने दो कलियों को तोड़ो मत तुम बेटी तो घर की लक्ष्मी है उससे मुँह मोड़ो मत तुम घर में चहकती रहती है कटुता भी हँस…