कीमत चुकानी होगी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

कीमत चुकानी होगी मनहरण घनाक्षरी छंद में बिजली के कटने से, बढ़ जाती परेशानी, ए सी में जो रहने की, हो जाती आदत है। घटाएंँ बरसने से, मौसम बदल जाता,…

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठक

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद पाँव में पाजेब मनहर बाँध अपने। नाचते हैं श्याम बनकर बाल सपने।। देखकर नंगे कदम के दाँव प्यारे। झूमता है मन मयूरा भी हमारे।।…

कर्म – गिरींद्र मोहन झा

कर्म जो किया जाता है, वही होता है ‘कर्म’, जो करने योग्य हो, वही है कर्त्तव्य-कर्म, कहते हैं, कर्म के होते हैं तीन प्रकार, प्रारब्ध, संचित और क्रियमाण कर्म, जो…

एक पेड़ मांँ के नाम – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

एक पेड़ मांँ के नाम मनहरण घनाक्षरी छंद में बहुत खुशी की बात, आ गई है बरसात, पेड़-पौधे लगाकर, धरा को सजाइए। जहांँ हो जगह खाली, खेत-भूमि नमी वाली, एक…

यह धरती है प्रभु की प्यारी – अमरनाथ त्रिवेदी

यह धरती है प्रभु की प्यारी हम बच्चे अपने धुन में गाएँ, प्रभु चरणों में शीश नवाएँ । जिनका है धरती और अम्बर , उनके प्रति हम भक्ति बढ़ाएँ ।…

जीवन का क्या मोल है – महाचण्डिका छंद गीत – राम किशोर पाठक

जीवन का क्या मोल है – महाचण्डिका छंद गीत सुख की इच्छा में फँसा, विवश हुआ वह मौन है। जीवन का क्या मोल है, यहाँ समझता कौन है।। दे हाथों…