Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

Ram Kishore Pathak

मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठकमानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक

0 Comments 11:25 pm

मानवता जो जीवित मन में, उत्तम हर व्यवहार। भरा रहे मन नित खुशियों से, हर जीवों से प्यार।। सरल नहीं[...]

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Ram Kishore Pathak

चैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठकचैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठक

0 Comments 11:23 pm

चैत्र पावन मास है। माँ बता क्यों खास है।। नेह से माँ लाल को। चूम उसके भाल को।। आज है[...]

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परीक्षा-नैना कुमारी परीक्षा-नैना कुमारी 

0 Comments 11:21 pm

खेलकूद में नहीं बिताना  बच्चों अपना पूरा साल आएगा मार्च होगी परीक्षा  होगा तेरा बूरा हाल  गणित के प्रश्न पत्र[...]

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Ram Kishore Pathak

अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठकअहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक

0 Comments 7:26 pm

वीरों की गाथाओं में है, एक पुराना नाम। वीरांगना अहिल्याबाई, को हम करें प्रणाम।। महाराष्ट्र साम्राज्य मराठा, चौंड़ी नामक गाँव।[...]

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Ram Kishore Pathak

अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठकअंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक

0 Comments 7:18 pm

अंग-अंग प्रेम रंग। साँवरा बना विहंग।। राधिका उदास जान। छेड़ मंद-मंद तान।। सौम्य गीत प्रेम गान। कुंज ढूँढता निदान।। ध्यान[...]

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Girindra Mohan Jha

गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झागीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 7:14 pm

श्रीकृष्ण कहते, तुझमें शक्ति है, तू परंतप, महाबाहो, महावीर है, तू पार्थ, ईश्वर का पवित्र अंश, गुडाकेश, साहसी, परम धीर[...]

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Ram Kishore Pathak

जीत का उत्सव-राम किशोर पाठकजीत का उत्सव-राम किशोर पाठक

0 Comments 8:33 pm

जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते। कभी हार जब गले लगाती, नजर झुकाए हम रोते।। हार-जीत दोनों[...]

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Ram Kishore Pathak

नींद से अब जागिए-राम किशोर पाठकनींद से अब जागिए-राम किशोर पाठक

0 Comments 8:26 pm

नींद से जग जाइए। गीत प्रभु का गाइए।। भूल कड़वी बात को। प्रेम से मुस्काइए।। दोष जिसका भी रहा। रोष[...]

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Ram Kishore Pathak

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठककुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:22 pm

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी। निकले जब भी मुख से वाणी।। निज पर इतना अभिमान न कर। अपना इतना[...]

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Ram Kishore Pathak

होली-कहमुकरी- राम किशोर पाठकहोली-कहमुकरी- राम किशोर पाठक

0 Comments 2:38 pm

उसके आते नर्तन करती। मन में नव भावों को गढ़ती।। बहकाए वह मेरी बोली। क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।।[...]

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